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  शिवपुरी।  शिवपुरी के बदरवास विकासखंड स्थित बारई गांव में गोवंश संरक्षण की एक नई इबारत लिखी जाने वाली है। प्रदेश सरकार की स्वावलंबी गौशाला ...

 शिवपुरी। शिवपुरी के बदरवास विकासखंड स्थित बारई गांव में गोवंश संरक्षण की एक नई इबारत लिखी जाने वाली है। प्रदेश सरकार की स्वावलंबी गौशाला नीति-2025 के तहत यहाँ 370 बीघा (74 हेक्टेयर) जमीन पर 5 हजार गोवंश की क्षमता वाली एक हाईटेक गौशाला स्थापित की जाएगी। यह सिर्फ एक गोशाला नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का ऐसा केंद्र होगा जहाँ दूध और चारे के साथ-साथ बायोगैस, जैविक खाद, आयुष और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। 50 करोड़ के निवेश और निजी संस्थाओं के अनुभव से संचालित होने वाला यह प्रोजेक्ट निराश्रित गोवंश के प्रबंधन में मील का पत्थर साबित होगा।


प्रदेश सरकार 55 जिलों में स्वावलंबी गौशाला खोलने जा रही है। शिवपुरी सहित 25 जिलों में गोशालाओं के लिए जमीन आवंटित हो गई हैं। यह गोशालाएं निजी संस्थाएं संचालित करेंगी। 5 हजार गोवंश पालन का अनुभव या 10 करोड़ के टर्न ओवर अथवा 3 साल का बायोगैस संचालन करने वाली संस्था को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। अब शासन स्तर से टेंडर जारी होने हैं।

कामधेनु निवास की स्थापना की नीति 2025 बनाई
जानकारी के मुताबिक प्रदेश सरकार ने गोवंश के लिए बड़ी गोशालाएं स्थापित करने के लिए स्वावलंबी गोशालाओं (कामधेनु निवास) की स्थापना की नीति 2025 बनाई। इसी के तहत शिवपुरी जिले की बदरवास तहसील के बारई गांव में चार अलग-अलग सर्वे नंबरों की कुल 74 हेक्टेयर जमीन राजस्व विभाग ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग को आवंटित कर दी है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा निजी पूंजी निवेशकों को निराश्रित गोवंश के प्रबंधन के लिए यह जमीन आवंटित की जाती है। गौशाला में गोपालन, नस्ल सुधार, पंचगव्य, दुग्ध प्रसंस्करण, कृषि, चारा विकास, उद्यानिकी, ऊर्जा जैविक खाद, आयुष एवं पर्यटन के क्षेत्रों में वाणिज्यिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इस जमीन पर स्वावलंबी गौशाला स्थापित करने के लिए शासन स्तर से टेंडर प्रक्रिया होनी है।

संस्था को 50 लाख रुपए की अमानत राशि जमा करानी होगी
50 करोड़ निवेश की परियोजना प्रस्तुत करने वाली गोपालक संस्थाएं ही अनुबंध कर सकेंगी। 5 हजार गोवंश के लिए 125 एकड़ जमीन के साथ 50 लाख रु. की अमानत राशि, 1 हजार अतिरिक्त गोवंश के लिए 25 एकड़ जमीन के लिए 10 लाख रु. अमानत राशि रहेगी। लेआउट प्लान, फेसिंग,बिजली, पानी की व्यवस्था व अन्य कार्य 6 माह में कराने होंगे। 12 माह में कुल निराश्रित गोवंश संख्या के 30% का व्यवस्थापन करना होगा। 24 माह में 70% गोवंश और 36 माह में 100% व्यवस्थापन करना होगा। 5 हजार गोवंश पर 1 पशु चिकित्सक, 3 सहायक की नियुक्ति जरूरी है।

भैंस, संकर और विदेशी नस्ल की गाय प्रतिबंधित
परियोजना में कम से कम 70% गोवंश निराश्रित, अशक्त और गैर-दुधारू होना चाहिए: अधिकतम 30% उत्पादक दुधारू नस्ल रखी जा सकती है। भैंस, संकर या विदेशी नस्ल की गायें नहीं होंगी। गोवंश की मौत पशु अस्पताल में रिपोर्ट करनी होगी। 1,000 गोवंश के लिए 25 एकड़ जमीन दी जाएगी, गोबर, गोमूत्र और दूध से उत्पाद निर्माण के लिए 5 एकड़ अतिरिक्त शामिल होगा।

स्वावलंबी गौशाला के लिए बदरवास तहसील 
के बारई में 74 हेक्टेयर जमीन आवंटित हो गई है। अब शासन स्तर से ही टें

डर प्रक्रिया होनी है। इस गौशाला को निजी संस्था को दिया जाएगा। गौशाला में 5 हजार गोवंश रखा जाएगा। प्रति निराश्रित गोवंश 40 रु. का भुगतान शासन करेगा।
- डॉ. एलआर शर्मा, डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन एवं डेयरी विभाग जिला शिवपुरी

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