है. शिवपुरीवासियों के लिए सबसे बड़ी कहानी यह होगी कि इस कहानी का नायक नरवर के राजा नल का पुत्र है। राजस्थान में आज भी इस प्रेमी जोड़े का ज...
है. शिवपुरीवासियों के लिए सबसे बड़ी कहानी यह होगी कि इस कहानी का नायक नरवर के राजा नल का पुत्र है।
राजस्थान में आज भी इस प्रेमी जोड़े का ज़िक्र यहां के लोकगीतों में होता है। कहा जाता है कि नरवर के राजा नल की तीन वर्षीय पुत्री सल्लकुमार का विवाह बचपन में उस समय के जांगलू देश में हुआ था, अब यात्रा के पुंगल नामक स्वामी के स्वामी राजा पिंगल की पुत्री से हुई थी। बाल विवाह होने के कारण दुल्हन मुस्लिम नहीं गई थी।
विस्स्क होने पर प्रिंस की एक और शादी कर दी गई। राजकुमार अपने बचपन में हुई शादी को भूल गए थे। उधर जांगलू देश की राजकुमारी अब सयानी हो गई थी। उनके माता-पिता ने उन्हें नरवर तक ले जाने के लिए कई संदेश भेजे, लेकिन कोई भी संदेश राजकुमार तक नहीं पहुंच सका।
इस लोक नृत्य और मंचन में दर्शाया गया है कि राजकुमार की पत्नी राजा पिंगल द्वारा कहानी संदेश वाहकों को मरवा डालती थी। उन्हें इस बात का डर था कि अगर प्रिंस को उनकी पहली पत्नी के बारे में कुछ भी याद आए तो सबसे पहले उन्हें ठीक करने के लिए आगे बढ़ें।

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