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की गौशाला, ई-कॉमर्स को दे रही है चुनौती, होलिका दहन के 36 हजार कंडे तैयार

  शिवपुरी।  मध्य प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए होलिका दहन में लकड़ी की जगह उपले और गोकाष्ठ के उपयोग...


 शिवपुरी। मध्य प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए होलिका दहन में लकड़ी की जगह उपले और गोकाष्ठ के उपयोग की पहल की है। इसका उद्देश्य जलाऊ लकड़ी की कटाई रोकना और प्रदूषण कम करना है। शिवपुरी जिला प्रशासन ने शनिवार को सभी 11 नगरीय निकायों को पत्र जारी कर कहा कि सार्वजनिक होलिका दहन कार्यक्रमों का निःशुल्क पंजीयन कराया जाए और आयोजन पूरी तरह सुरक्षित एवं पर्यावरण मित्र हो। जिले की 13 गौशालाओं में कुल 36 हजार कंडों की सूची भी जारी की गई है। ये कंडे ई-कॉमर्स की तुलना में 50% कम कीमत पर उपलब्ध हैं, जिससे आम जनता को भी लाभ होगा।


अपर कलेक्टर दिनेश चंद्र शुक्ला ने निर्देश दिए कि होलिका दहन स्थल पर कार्यक्रम के प्रारंभ, पूर्व और पश्चात फोटो लेना अनिवार्य होगा, सभी फोटो जियो-टैग के साथ होने चाहिए। पंजीयन के समय आयोजक संस्था की संक्षिप्त जानकारी, पदाधिकारी और संपर्क नंबर दर्ज किए जाएँ। जलाऊ लकड़ी की जगह गोकाष्ठ आधारित होलिका दहन को प्रोत्साहित किया जाएगा और सभी संबंधित अधिकारियों को इसका पूरा प्रतिवेदन कलेक्टर को भेजना होगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

पिछोर टेकरी सरकार गौशाला में 7 हजार कंडे
पशुपालन विभाग के उप संचालक ने गौशालाओं की सूची जारी कर कंडों की जानकारी उपलब्ध कराई है। सबसे ज्यादा पिछोर की टेकरी सरकार गौशाला में 7 हजार कंडे उपलब्ध हैं।

वहीं खनियाधाना की मां बंगला वाली गोशाला, बामौरकलां में 6 हजार, शिवपुरी की सतनवाड़ा गौशाला में 1 हजार, कोलारस की पवा गौशाला में 3 हजार, दयोदय पशु सेवा केंद्र गौशाला सेसई में 3 हजार, पोहरी की नारायणपुरा गोशाला रैय्यन में 1 हजार, बदरवास की माधव गौशाला अटलपुर में 5 हजार, जय बांके बिहारी गौशाला सड़बूड में हजार, करैरा की थनरा गौशाला में 2 हजार, बैसोरा कलाँ गौशाला में 2 हजार, खैराई गौशाला में 1 हजार, आमोलपठा गौशाला में 1 हजार और उकायला गौशाला में 1 हजार कंडे उपलब्ध हैं। 

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