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युद्ध का प्रभाव किसानों पर, वैश्विक मंदी के कारण भाव गिरे, सरकार को बेचेंगे गेहूं, लेकिन वारदाने का संकट

  पेट्रोलियम संकट का कृषि पर असर: जूट पर बैन और युद्ध के कारण प्लास्टिक बैग्स की कमी, क्या समय पर हो पाएगी गेहूं की तुलाई शिवपुरी।  ईरान और ...

 पेट्रोलियम संकट का कृषि पर असर: जूट पर बैन और युद्ध के कारण प्लास्टिक बैग्स की कमी, क्या समय पर हो पाएगी गेहूं की तुलाई


शिवपुरी। ईरान और युद्ध का असर किसानों पर देखने को मिल रहा है। वैश्विक बाजार में मंदी के कारण गेहूं के भाव गिर गए है इस कारण किसानों ने सरकार को गेहूं बेचने का फैसला लिया है। क्योंकि बाजार से अधिक सरकार गेहूं का भाव दे रही है। इस कारण किसानों ने सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए जमकर पंजीयन करवाए हैं, जो पिछले साल की तुलना में काफी अधिक हैं। वहीं दूसरी ओर इस बार उम्मीद है कि खरीद केंद्रों पर खरीद शुरू होते ही केंद्रों पर किसानों की कतार लगना शुरू हो जाएगी।

इसका मुख्य कारण यह माना जा रहा है कि सरकार ने गेहूं का जो न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है वह बाजार में मिल रहे दामों से अधिक है। इस कारण किसान इस बार व्यापारी के यहां गेहूं बेचने की बजाय सरकार को ही अपनी उपज विक्रय करेगा,लेकिन इस गुड न्यूज को डराने वाली एक खबर है कि इस युद्ध के कारण सरकार के पास गेहूं रखने का बारदाना नहीं है।  

इस कारण बढ़े पंजीयन
-वर्ष 2024-25 में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित गेहूं का एमएसपी 2425 रुपये प्रति क्विंटल।
-वर्ष 2024-25 में मप्र सरकार ने 175 रुपये बोनस मिलाकर 2600 रुपये में गेहूं खरीदा।
-वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित गेहूं का एमएसपी 2585 रुपये प्रति क्विंटल।
-वर्ष 2025-26 में मप्र सरकार 40 रुपये क्विंटल बोनस मिलाकर 2625 रुपये गेहूं खरीदेगी।

72 हजार 537 हेक्टेयर की फसल पहुंचेगी खरीद केंद्र
इस साल 25 हजार 513 किसानों ने करवाया फसल बेचने पंजीयन कराया गया है। अगर जिले भर में हुए पंजीयन के आधार पर अनुमान लगाया जाए तो सरकार द्वारा स्थापित किए जाने वाले खरीद केंद्रों पर 72 हजार 537.06 हेक्टेयर भूमि में उपजाई गई फसल बेचने के लिए पहुंचेगी। इसमें पिछोर में 11820, कोलारस में 10229.19, खनियाधाना में 12854.14, बदरवास में 10292.39, करैरा में 6890.88, रन्नौद में 7587.50, नरवर में 5570.45, शिवपुरी में 4842.91, पोहरी में 1486.81, बैराड़ में 926.41, शिवपुरी नगद में 36.38 हेक्टेयर भूमि पर उगाई गई फसल का विक्रय न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकार को करने के लिए किसानों ने पंजीयन करवाए हैं।

अधिक दाम मिलने के कारण भी सरकार को बेचेंगे गेहूं
शिवपुरी में व्यवसायियों के यहां वर्तमान में किसानों को गेहूं का जो दाम मिल रहा है वह 2200 रुपये से लेकर 2350 रुपये तक है। ऐसे में जो जरूरतमंद और छोटे किसान हैं, वह व्यापारियों के यहां भी गेहूं बेचने के लिए पहुंच रहे हैं। इस संबंध में जब गल्ला व्यापारियों से बात की गई तो उनका कहना था कि इस बार युद्ध सहित तमाम व्यापारिक परिस्थितियों के कारण बड़े ब्रांडों का गेहूं और गेहूं का आदि उत्पाद बाहर नहीं जा रहा है। ऐसे में गेहूं की मांग में फिलहाल कमी बनी हुई है। यही कारण है कि निर्यात नहीं होने के कारण गेहूं की मांग घटी है और इसी कारण बाजार में दाम कम है। यह भी एक बड़ा कारण है कि किसान सरकार को ही अपना गेहूं एमएसपी पर बेचेगा, ताकि उसे अधिक दाम मिल सकें।

लेकिन सरकार पर वारदाना नही
इंसानो ने इस अपनी गेहूं की उपज सरकार को बेचने का फैसला लिया है लेकिन सरकार का पास वारदाना नही है। क्योकि 2025 से पूर्व जूट के वारदाने मे किसानों की फसल को भरा जाता था। यह जूट बांग्लादेश से आता था 2025 मे सरकार ने जूट से बने वारदाने के आयात पर रोक लगा दी थी। जूट के वारदाने के स्थान पर पीपी बैग मे किसानों की उपज को भरा जाने लगा,लेकिन इस युद्ध के कारण पेट्रोलियम का संकट बना हुआ है,इस कारण प्लास्टिक पीपी बैग के निर्माण पर संकट खड़ा हो गया है। बाजार मे प्लास्टिक से निर्मित युक्त सभी प्रोजेक्टों की कीमत लगातार बढ़ रही है। 

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