शिवपुरी। हर साल गर्मी आते ही पानी को लेकर परेशान होने वाले शिवपुरी शहर के लिए नगर पालिका ने इस बार बड़ी तैयारी तो कर ली है, लेकिन राहत अभ...
शिवपुरी। हर साल गर्मी आते ही पानी को लेकर परेशान होने वाले शिवपुरी शहर के लिए नगर पालिका ने इस बार बड़ी तैयारी तो कर ली है, लेकिन राहत अभी नहीं, इंतजार बाद में मिलेगा। शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सतनवाड़ा और मड़ीखेड़ा फिल्टर प्लांट पर नई मशीन लगाने की योजना बनाई गई है, जिस पर करीब 3.75 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
नगर पालिका का दावा है कि इस काम के पूरा होने के बाद शहर को 2040 तक 48 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। लेकिन सबसे बड़ा सच यह है कि अप्रैल, मई और जून की इस तपती गर्मी में शहरवासियों को इसका कोई फायदा नहीं मिलेगा।
पुरानी मोटरों ने बढ़ाई परेशानी, अब पहली बार होगा बड़ा नवीनीकरण
वर्तमान में शिवपुरी शहर को रोजाना करीब 40 एमएलडी पानी की सप्लाई मिल रही है, लेकिन यह व्यवस्था पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है। वजह है पुरानी मोटरों में बार-बार आने वाली खराबी, जिसके कारण जलापूर्ति कई बार अचानक प्रभावित हो जाती है।
इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए पहली बार व्यापक स्तर पर मोटरों का मेंटेनेंस और नवीनीकरण किया जा रहा है। नई योजना के तहत सतनवाड़ा और मड़ीखेड़ा फिल्टर प्लांट पर 150 एचपी की तीन-तीन नई मोटरें लगाई जाएंगी। कुल मिलाकर 6 नई मशीनें पानी सप्लाई सिस्टम को मजबूत करेंगी। नगर पालिका इंजीनियर सचिन चौहान का कहना है कि नई मशीनों के लगने के बाद पानी सप्लाई पहले की तुलना में अधिक निर्बाध और स्थिर हो सकेगी।
पांच बार निकले टेंडर, तब जाकर बनी बात
इस योजना को जमीन पर उतारने में सबसे बड़ी अड़चन टेंडर प्रक्रिया रही। बताया गया है कि इस काम के लिए पांच बार टेंडर निकाले गए, लेकिन शुरुआती दौर में ठेकेदारों ने रुचि नहीं दिखाई। अब जाकर प्रक्रिया पूरी हो सकी है और मशीनों की खरीद का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, टेंडर पूरा हो जाने के बाद भी काम में करीब तीन महीने का समय लगेगा, इसलिए इस बार की गर्मी में जनता को पुरानी व्यवस्था के भरोसे ही रहना होगा।
इस गर्मी फिर नहीं मिलेगी राहत
शहर में सबसे ज्यादा पानी की जरूरत अप्रैल से जून के बीच होती है। ऐसे समय में नई व्यवस्था लागू नहीं हो पाने से एक बार फिर लोगों को पानी संकट और सप्लाई की अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है। नगर पालिका के सीएमओ ईशांक धाकड़ ने माना कि यदि यह काम अप्रैल से पहले पूरा हो जाता, तो शहर को बड़ी राहत मिल सकती थी। लेकिन उन्होंने देरी की वजह अनुदान देर से मिलना बताई। उनके मुताबिक पहले 2 करोड़ रुपए की किश्त मिली, उसके बाद 15वें वित्त आयोग की अंतिम राशि उपलब्ध हुई। बजट मिलने के बाद ही मशीनों की खरीद और टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकी।
15 जून के बाद शुरू होगा काम
नगर पालिका का कहना है कि 15 जून के बाद मशीन लगाने का काम शुरू किया जाएगा और इसे तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यानी शहर को नई और बेहतर जलापूर्ति व्यवस्था का लाभ बरसात के बाद ही मिलने की संभावना है।
अब पानी में क्लोरीन भी मशीन तय करेगी
जल गुणवत्ता सुधारने के लिए नगर पालिका केवल मोटरें ही नहीं बदल रही, बल्कि क्लोरीनेशन सिस्टम को भी आधुनिक बनाया जा रहा है। अब तक पानी में क्लोरीन की मात्रा अनुमान के आधार पर डाली जाती थी, जो कर्मचारियों के अनुभव और अनुमान पर निर्भर रहती थी। लेकिन इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद सरकार ने जल गुणवत्ता को लेकर सख्ती दिखाई है। इसके बाद अब शिवपुरी में भी स्कोडा डिजिटल क्लोरीनेशन सिस्टम लगाया जाएगा। इस सिस्टम की खासियत यह होगी कि यह पानी में जरूरत के अनुसार सही मात्रा में क्लोरीन डालेगा। इस काम पर करीब 50 से 70 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। इससे शहर को मिलने वाले पानी की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों बेहतर होंगी।
आपातकालीन प्लान तैयार, टैंकरों की संख्या होगी दोगुनी
गर्मी के मौसम में संभावित संकट को देखते हुए नगर पालिका ने आपातकालीन कंट्रोल रूम भी तैयार किया है। यह कंट्रोल रूम कम्युनिटी हॉल में बनाया गया है, जहां से पूरे शहर की पेयजल व्यवस्था की निगरानी और नियंत्रण किया जाएगा।
फिलहाल शहर में 6 टैंकर चल रहे हैं, लेकिन यदि जरूरत बढ़ी तो इनकी संख्या बढ़ाकर 12 कर दी जाएगी। यानी नगर पालिका ने मान लिया है कि इस गर्मी में टैंकरों का सहारा फिर जरूरी पड़ सकता है।
एक नजर: शिवपुरी की पानी सप्लाई की मौजूदा तस्वीर
शहर में पानी व्यवस्था का हाल
शहर की कुल जरूरत – 40 एमएलडी
मड़ीखेड़ा-सिंध से सप्लाई – 35 से 40 एमएलडी
बाणगंगा फिल्टर प्लांट से सप्लाई – 5 एमएलडी
494 बोरवेल से सप्लाई – 10 एमएलडी
शहर में टंकियां – 18
संपवेल – 9
नल कनेक्शन – करीब 25 हजार
इस योजना को जमीन पर उतारने में सबसे बड़ी अड़चन टेंडर प्रक्रिया रही। बताया गया है कि इस काम के लिए पांच बार टेंडर निकाले गए, लेकिन शुरुआती दौर में ठेकेदारों ने रुचि नहीं दिखाई। अब जाकर प्रक्रिया पूरी हो सकी है और मशीनों की खरीद का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, टेंडर पूरा हो जाने के बाद भी काम में करीब तीन महीने का समय लगेगा, इसलिए इस बार की गर्मी में जनता को पुरानी व्यवस्था के भरोसे ही रहना होगा।
इस गर्मी फिर नहीं मिलेगी राहत
शहर में सबसे ज्यादा पानी की जरूरत अप्रैल से जून के बीच होती है। ऐसे समय में नई व्यवस्था लागू नहीं हो पाने से एक बार फिर लोगों को पानी संकट और सप्लाई की अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है। नगर पालिका के सीएमओ ईशांक धाकड़ ने माना कि यदि यह काम अप्रैल से पहले पूरा हो जाता, तो शहर को बड़ी राहत मिल सकती थी। लेकिन उन्होंने देरी की वजह अनुदान देर से मिलना बताई। उनके मुताबिक पहले 2 करोड़ रुपए की किश्त मिली, उसके बाद 15वें वित्त आयोग की अंतिम राशि उपलब्ध हुई। बजट मिलने के बाद ही मशीनों की खरीद और टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकी।
15 जून के बाद शुरू होगा काम
नगर पालिका का कहना है कि 15 जून के बाद मशीन लगाने का काम शुरू किया जाएगा और इसे तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यानी शहर को नई और बेहतर जलापूर्ति व्यवस्था का लाभ बरसात के बाद ही मिलने की संभावना है।
अब पानी में क्लोरीन भी मशीन तय करेगी
जल गुणवत्ता सुधारने के लिए नगर पालिका केवल मोटरें ही नहीं बदल रही, बल्कि क्लोरीनेशन सिस्टम को भी आधुनिक बनाया जा रहा है। अब तक पानी में क्लोरीन की मात्रा अनुमान के आधार पर डाली जाती थी, जो कर्मचारियों के अनुभव और अनुमान पर निर्भर रहती थी। लेकिन इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद सरकार ने जल गुणवत्ता को लेकर सख्ती दिखाई है। इसके बाद अब शिवपुरी में भी स्कोडा डिजिटल क्लोरीनेशन सिस्टम लगाया जाएगा। इस सिस्टम की खासियत यह होगी कि यह पानी में जरूरत के अनुसार सही मात्रा में क्लोरीन डालेगा। इस काम पर करीब 50 से 70 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। इससे शहर को मिलने वाले पानी की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों बेहतर होंगी।
आपातकालीन प्लान तैयार, टैंकरों की संख्या होगी दोगुनी
गर्मी के मौसम में संभावित संकट को देखते हुए नगर पालिका ने आपातकालीन कंट्रोल रूम भी तैयार किया है। यह कंट्रोल रूम कम्युनिटी हॉल में बनाया गया है, जहां से पूरे शहर की पेयजल व्यवस्था की निगरानी और नियंत्रण किया जाएगा।
फिलहाल शहर में 6 टैंकर चल रहे हैं, लेकिन यदि जरूरत बढ़ी तो इनकी संख्या बढ़ाकर 12 कर दी जाएगी। यानी नगर पालिका ने मान लिया है कि इस गर्मी में टैंकरों का सहारा फिर जरूरी पड़ सकता है।
एक नजर: शिवपुरी की पानी सप्लाई की मौजूदा तस्वीर
शहर में पानी व्यवस्था का हाल
शहर की कुल जरूरत – 40 एमएलडी
मड़ीखेड़ा-सिंध से सप्लाई – 35 से 40 एमएलडी
बाणगंगा फिल्टर प्लांट से सप्लाई – 5 एमएलडी
494 बोरवेल से सप्लाई – 10 एमएलडी
शहर में टंकियां – 18
संपवेल – 9
नल कनेक्शन – करीब 25 हजार
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